पूज्यश्री का कथन है -अपने जीवन को ऐसा संवारें की हर दिन होली और हर रात दिवाली बन जाए ! अर्थात आपकेजीवन में खुशी ,प्रेम व् आनन्द के फूल खिले और ज्ञान की ज्योति से जगमगाते रहें ! जो भी जीवन में आया हे उसे आनन्द के साथ बिताएं !सब अपने जीवन में रस और सुगंध को खोजें और उसे खुलकर आनन्द के साथ सबको लुटा दें ! जिससे जीवन के बयार बसंत की बहार बन जाए ! हर इंसान में आ जाएँ खुशी की कलियाँ ,उनमें खिल जाएँ आनन्द के फूल चारों और छा जाए प्रेम की सुगंध !
आज से जिन्दगी को व्यवस्थित करो, अनुशासित करो, योजनाबद्द तरीक़े से चलो व नियमित होने की चेष्टा शुरु कर दीजिए। आत्म सुधार व आत्मिक विकास के लिए आज से चेष्टा शुरु होनी चाहिए खुद से खुद का उद्धार कीजिए। अपनी कमजोरियो पर विजय पाइए। आज से शुरु हो जाइए "
आपके पास आटा हे ,दाल हे ,पानी हे ,मगर रोटी बनानी नहीं आती तो कैसे बनाओगे ! ठीक इसी प्रकार भगवान ने जिंदगी दी हे पर जीने का तरीका नहीं दिया व्ह सदगुरु देता हे