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parampujy Guruvar Sudhanshuji Maharaj ka Shishay

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Tuesday, February 17, 2015

उम्र के त्यौहार


  • अश्क आख़िर अश्क है शबनम नहीं है ,
  • दर्द आखिर दर्द है सरगम नहीं है ,
  • उम्र के त्यौहार में रोना मना है ,
  • जिंदगी आख़िर जिंदगी है मातम नहीं है !
  • परम पूज्य सुधांशुजी महाराज
  • Saturday, February 14, 2015

    अपना मन



    • भक्त वह है जो अपना मन उस पृथ्वी के समान बना ले जिस मैं लोग विष्टा डालते हैं पर वह अन्न देती है !
    • परम पूज्य सुधांशुजी महाराज

    Friday, February 13, 2015

    जितनी महिमा माँ



    • ऐक बार ऐक व्यक्ति ने स्वामी विवेकानन्द से पूछा , स्वामीजी सासार में जितनी महिमा माँ की हे उतनी पिताओं की क्यों नहीं हे ! स्वामी विवेकानंद ने ऐक बडा सा पत्थर मँगवाया और उस व्यक्ति से कहा कि त्तुम
      आज घर लौट कर अपने सारे काम ईस पत्थर को अपनी कमर से बाँधकर करना तुम को खुद मालूम हो जायेगा !
      अगले दिन वह व्यक्ति फिर स्वामी जी के पास आया और बोला -स्वामी जी यह आपने कैसा काम दिया मुझे ! मेरी कमर में भयानक दर्द हो रहा हे , पर इससे मेरे सवाल का जवाब तो नहीं मिला !
      विवेकानंद मुस्करा कर बोले बस इसी में प्रशन का जवाब हे ! ऐक ही दिन में तुम इतने कष्ट में आगयेजब कि ऐक माँ तमाम कष्टों को सहते हुए नौ महीने तक संतान को पेट में पालती है ! इसलिए इस संसार में उस की नहीं तो किस कि महिमा होगी !
      अब उसके समझ में आया कि माँ को महत्व क्यों देते हें

    Thursday, February 12, 2015

    जीवन का सबसे

    from whatapps
    जीवन का सबसे बड़ा अपराध - किसी की आँख में आंसू आपकी वजह से होना।
    और
    जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि - किसी की आँख में आंसू आपके लिए होना।

    ईश्वर का दिया

    from whatapps
    ईश्वर का दिया कभी अल्प नहीं होता;
    जो टूट जाये वो संकल्प नहीं होता;
    हार को लक्ष्य से दूर ही रखना;
    क्योंकि जीत का कोई विकल्प नहीं होता।

    Tuesday, February 10, 2015

    दुखों को सहने

    • दुखों को सहने की शक्ति हो और उलझनों को सुलझाने की सुबुधि हों वह मालामाल है !

    Sunday, February 8, 2015

    प्रभु कृपा से मिलती





    "जिस जिन्दगी में शान्ति नहीं हें वो कुछ भी कर ले वो अधूरा इन्सान हें। शान्ति से ही विकास होता है।
     आप जिन्दगी में अगर किसी को महत्व दें तो मन की शान्ति को महत्व दीजिए
     और वो प्रभु कृपा से मिलती है, सदगुरु की शरण से मिलती है।"

    Saturday, February 7, 2015

    भगवान को

      



    • भगवान को भूलना मत ,

    • सत्य को छोड़ना मत ,

    • संपति से फूलना मत ,

    • विपत्ती मैं मुरझाना मत ,

    • परमार्थ सेवा कराने से रुकना मत !

    Friday, February 6, 2015

    मनुष्य की यही महिमा




    "मनुष्य की यही महिमा हें कि वह स्वतन्त्र हें कर्म करने में और न करने में भी वह स्वतन्त्र हें और यही उसका विषाद भी हें । मनुष्य गलत करने में भी स्वतन्त्र हें । स्वतन्त्रता में गलत और सही दोनों की स्वतन्त्रता हें ।"

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