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parampujy Guruvar Sudhanshuji Maharaj ka Shishay

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Thursday, November 12, 2015

Fwd:


---------- Forwarded message ----------
From: Madan Gopal Garga <mggarga2013@gmail.com>
Date: 2015-11-11 5:41 GMT+05:30
Subject:
To: Madan Gopal Garga <mggarga@gmail.com>


हम दीपावली का त्यौहार क्यूँ मनाते है?

इसका अधिकतर उत्तर मिलता है राम जी के वनवास से लौटने की ख़ुशी में।
सच है पर अधूरा।। अगर ऐसा ही है तो फिर हम सब दीपावली पर भगवान राम की पूजा क्यों नहीं करते? लक्ष्मी जी और गणेश भगवान की क्यों करते है?
सोच में पड़ गए न आप भी।

इसका उत्तर आप तक पहुँचाने का प्रयत्न कर रहा हूँ अगर कोई त्रुटि रह जाये तो क्षमा कीजियेगा।

1. देवी लक्ष्मी जी का प्राकट्य:
देवी लक्ष्मी जी कार्तिक मॉस की अमावस्या के दिन समुन्दर मंथन में से अवतार लेकर प्रकट हुई थी।

2. भगवान विष्णु द्वारा लक्ष्मी जी को बचाना:
भगवान विष्णु ने आज ही के दिन अपने पांचवे अवतार वामन अवतार में देवी लक्ष्मी को राजा बालि से मुक्त करवाया था।

3. नरकासुर वध कृष्ण द्वारा:
इस दिन भगवान कृष्ण ने राक्षसों के राजा नरकासुर का वध कर उसके चंगुल से 16000 औरतों को मुक्त करवाया था। इसी ख़ुशी में दीपावली का त्यौहार दो दिन तक मनाया गया। इसे विजय पर्व के नाम से भी जाना जाता है।

4. पांडवो की वापसी:
महाभारत में लिखे अनुसार कार्तिक अमावस्या को पांडव अपना 12 साल का वनवास काट कर वापिस आये थे जो की उन्हें चौसर में कौरवो द्वारा हराये जाने के परिणाम स्वरूप मिला था। इस प्रकार उनके लौटने की खुशी में दीपावली मनाई गई।

5. राम जी की विजय पर :
रामायण के अनुसार ये चंद्रमा के कार्तिक मास की अमावस्या के नए दिन की शुरुआत थी जब भगवन राम माता सीता और लक्ष्मण जी अयोध्या वापिस लौटे थे रावण और उसकी लंका का दहन करके। अयोध्या के नागरिकों ने पुरे राज्य को इस प्रकार दीपमाला से प्रकाशित किया था जैसा आजतक कभी भी नहीं हुआ था।

6. विक्रमादित्य का राजतिलक:
आज ही के दिन भारत के महान राजा विक्रमदित्य का राज्याभिषेक हुआ था। इसी कारण दीपावली अपने आप में एक ऐतिहासिक घटना भी है।

7. आर्य समाज के लिए प्रमुख दिन:
आज ही के दिन कार्तिक अमावस्या को एक महान व्यक्ति स्वामी दयानंद सरस्वती जी ने हिंदुत्व का अस्तित्व बनाये रखने के लिए आर्य समाज की स्थापना की थी।

8. जैन धर्म का एक महत्वपूर्ण दिन:
महावीर तीर्थंकर जी ने कार्तिक मास की अमावस्या के दिन ही मोक्ष प्राप्त किया था।

9. सिक्खों के लिए महत्त्व:
तीसरे सिक्ख गुरु गुरु अमरदास जी ने लाल पत्र दिवस के रूप में मनाया था जिसमे सभी श्रद्धालु गुरु से आशीर्वाद लेने पहुंचे थे और 1577 में अमृतसर में हरिमंदिर साहिब का शिलान्यास किया गया था।

1619 में सिक्ख गुरु हरगोबिन्द जी को ग्वालियर के किले में 52 राजाओ के साथ मुक्त किया गया था जिन्हें मुगल बादशाह जहांगीर ने नजरबन्द किया हुआ था। इसे सिक्ख समाज बंदी छोड़ दिवस के रूप में भी जानते हैं।

10. द पोप का दीपावली पर भाषण:
1999 में पॉप जॉन पॉल 2 ने भारत में एक खास भाषण दिया था जिसमे चर्च को दीपावली के दीयों से सजाया गया था। पॉप के माथे पर तिलक लगाया गया था। और उन्होंने दीपावली के संदर्भ में रोंगटे खड़े कर देने वाली बाते बताई।

भगवान् गणेश सभी देवो में प्रथम पूजनीय है इसी कारण उनकी देवी लक्ष्मी जी के साथ दीपावली पर पूजा होती है और बाकी सभी कारणों के लिए हम दीपमाला लगाकर दीपावली का त्यौहार मनाते हैं।

अब आपसे एक विनम्र निवेदन की इस जानकारी को अपने परिवार अपने बच्चों से जरूर साँझा करे । ताकि उन्हें दीपावली के महत्त्व की पूरी जानकारी प्राप्त हो सके!
शुभ दीपावली


Saturday, November 7, 2015

सीखना

सीखना जारी रहना चाहिए, सीखना रुकना नही चाहिए।

परम पूज्य सुधांशुजी महाराज

Thursday, November 5, 2015

कीमती पैसा नहीं

कीमती पैसा नहीं है वह तो जीवन चलाने के लिए है। जीवन को कीमती बनाने के लिए कीमती है सदविचार्।

परम पूज्य सुधांशुजी महाराज

Saturday, October 24, 2015

जीवन का उद्देश्य


मनुष्य जीवन का उद्देश्य अपने आपको जानना और प्रभु को पाना है।

परम पूज्य सुधांशुजी महाराज

Fwd:

When BHAKTI enters FOOD,

FOOD becomes PRASAD,

When BHAKTI enters HUNGER,
HUNGER becomes a FAST,

When BHAKTI enters WATER,
WATER becomes CHARANAMRIT,

When BHAKTI enters TRAVEL,
TRAVEL becomes a PILGRIMAGE,

When BHAKTI enters MUSIC,
MUSIC becomes KIRTAN,

When BHAKTI enters a HOUSE,
HOUSE becomes a TEMPLE,

When BHAKTI enters ACTIONS,
ACTIONS become SERVICES,

When BHAKTI enters in WORK,
WORK becomes KARMA,

AND

When BHAKTI enters a MAN,

MAN becomes HUMAN.

😇😇😇😇😇


20 रूपये लीटर में बिक


आज देश के 80% रेलवे स्टेशन
पर खारा पानी मिलता
है।
और बोतल बँद पानी धड्ले
से 20 रूपये लीटर में बिक
रहा है।
मेरा मानना है की
करोड़ो रूपये की लागत से
बने रेलवे स्टेशन पर क्या
3-4 लाख रूपये और लगाकर
30-40 RO water फ़िल्टर
नहीं लगाये जा सकते।
आप कह सकते है की इनका
maintenence महंगा हो
जायेगा तो मेरा तर्क है
की क्या इन RO के पास में
दान पात्र रखा जा
सकता है।
मुझे पूरा विशवास है की
मेरे भारत वर्ष की
दानवीर जनता 1-2 रूपये
करके daily इतना पैसा तो
डाल ही देगी की जितने से
इन RO का daily
maintenence हो सके।
इससे न केवल जनता को
मज़बूरी में पानी 20 रूपये
लीटर खरीदना पड़ेगा
बल्कि साथ ही प्लास्टिक
बोतलों से पर्यावरण को
होने वाले नुकसान से देश
को मुक्ति मिल जाएगी।
हाँ ऐसा होने पर पानी
बेचने वालो की जरुर
छुट्टी हो जाएगी।
किसी सरकार ने ऐसा
किया नहीं
क्योंकि 1 रूपये से भी कम
का पानी जब 20 रूपये में
बिकता है तो शेयर उपर
तक जाता है।
क्या इस पानी घोटाले
को बंद करवाने के लिए आप
हमारे साथ हैं।
अगर हाँ तो ये मेसेज इतना
शेयर कीजिये की सरकार
तक पहुँच जाये।
क्या आप एक जिम्मेदार
नागरिक होंने का फ़र्ज़
निभाएंगे ?

Fwd: Shared a post - "*Pujyavar with Pujya Morari Bapu in Gujarat..."

yavar with Pujya Morari Bapu in Gujarat..."

Pujyavar with Pujya Morari Bapu in Gujarat Ram Katha on October 20, 2015
Om Guruve Namah ! Historic Moments.....Do santon ka milan Hariom All. Earlier this week on October 20, 2015 our Sadguru was in Gujarat at the Holy ram Katha on invitation of Pujya Morari Bapuji. Two God-Realized saints together and thousands of devotees fee...
image not displayed
Pujyavar with Pujya Morari Bapu in Gujarat Ram Katha on October 20, 2015
Om Guruve Namah ! Historic Moments.....Do santon ka milan Hariom All. Earlier this week on October 20, 2015 our Sadguru was in Gujarat at the Hol...

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Friday, October 23, 2015

Fwd:




जय माता दी

🌹नवरात्रि में कन्या पूजन का महत्व🌹


💥नवरात्रि सौन्दर्य, हर्ष उल्लास, उमंगो का पर्व है। कहते है नवरात्रि में माँ दुर्गा धरती पर भ्रमण करती है और अपने सच्चे भक्तों पर कृपा द्रष्टि बरसाते हुए उनकी समस्त मनोकामनाएं पूर्ण करती है ।

💥नवरात्रि में माता की कृपा पाने के लिए 2 से लेकर 10 वर्ष तक की नन्ही कन्याओं के पूजन का विशेष महत्व है। पुराणों के अनुसार इनके माध्यम से माता दुर्गा को बहुत आसानी से प्रसन्न किया जा सकता है। वस्तुत: ये कुमारी कन्याएँ माँ आदि शक्ति का ही स्वरूप मानी गयी है ।

💥शास्त्रों के अनुसार दो वर्ष की कन्या को कुमारी कहा गया है । कुमारी के पूजन से सभी तरह के दुखों और दरिद्रता का नाश होता है ।

💥तीन वर्ष की कन्या को त्रिमूर्ति माना गया है । त्रिमूर्ति के पूजन से धन लाभ होता है ।

💥चार वर्ष की कन्या को कल्याणी कहते है । कल्याणी के पूजन से जीवन के सभी क्षेत्रों में सफलता और सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है |

💥 पांच वर्ष की कन्या को रोहिणी कहा गया है । माँ के रोहणी स्वरूप की पूजा करने से जातक के घर परिवार से सभी रोग दूर होते है।

💥छः वर्ष की कन्या को काली कहते है । माँ के इस स्वरूप की पूजा करने से ज्ञान, बुद्धि, यश और सभी क्षेत्रों में विजय की प्राप्ति होती है ।

💥 सात वर्ष की कन्या को चंडिका कहते है । माँ चण्डिका के इस स्वरूप की पूजा करने से धन, सुख और सभी तरह की ऐश्वर्यों की प्राप्ति होती है ।

💥आठ वर्ष की कन्या को शाम्भवी कहते है । शाम्भवी की पूजा करने से युद्ध, न्यायलय में विजय और यश की प्राप्ति होती है ।

💥 नौ वर्ष की कन्या को दुर्गा का स्वरूप मानते है । माँ के इस स्वरूप की अर्चना करने से समस्त विघ्न बाधाएं दूर होती है, शत्रुओं का नाश होता है और कठिन से कठिन कार्यों में भी सफलता प्राप्त होती है ।

💥दस वर्ष की कन्या को सुभद्रा स्वरूपा माना गया हैं। माँ के इस स्वरूप की आराधना करने से सभी मनवाँछित फलों की प्राप्ति होती है और सभी प्रकार के सुख प्राप्त होते है ।

💥इसीलिए नवरात्र के इन नौ दिनों तक प्रतिदिन इन देवी स्वरुप कन्याओं को अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य से भेंट देना अति शुभ माना जाता है। इन दिनों इन नन्ही देवियों को फूल, श्रंगार सामग्री, मीठे फल (जैसे केले, सेब,नारियल आदि), मिठाई, खीर , हलवा, कपड़े, रुमाल,रिबन, खिलौने, मेहंदी आदि उपहार में देकर मां दुर्गा की अवश्य ही कृपा प्राप्त की जा सकती है ।

💥नवरात्रे की अष्टमी या नवमी के दिन जिस दिन आप कन्या खिलाएं / पूजन करें उस दिन दस साल से कम उम्र की नौ कन्याओं और एक लडके को पूर्ण श्रद्धा एवं प्रेम से भोजन करा कर यथा शक्ति उन्हें दक्षिणा और उपहार भी अवश्य ही देना चाहिए। अगर आप घर पर हवन कर रहे है तो उनके नन्हे नन्हे हाथों से हवन सामग्री अग्नि में अवश्य डलवाएं।

💥उन्हें इलायची, पान, हलवा / खीर पूरी या जलेबी / मिठाई का सेवन कराकर उन्हें दक्षिणा अवश्य ही दें। यदि संभव हो सके तो अंत में जाते समय उन्हें कोई न कोई बर्तन और एक एक चुनरी देकर घर से बेटी की तरह विदा करें ।

💥और हाँ ..मन........उन्हें विदा करते समय उनके चरण छूकर उनका आशीर्वाद ग्रहण करना कतई न भूलें।
इन उपरोक्त रीतियों के अनुसार माता की पूजा अर्चना करने से देवी मां प्रसन्न होकर हमें सुख, सौभाग्य,यश, कीर्ति, धन और अतुल वैभव का वरदान देती है।

🙏🌹जय माता दी🌹🙏🏻


Thursday, October 22, 2015

Fwd:




एक औरत ने तीन संतों को अपने घर के सामने
देखा। वह उन्हें जानती नहीं थी।

औरत ने कहा –
"कृपया भीतर आइये और भोजन करिए।"

संत बोले – "क्या तुम्हारे पति घर पर हैं?"

औरत – "नहीं, वे अभी बाहर गए हैं।"

संत –"हम तभी भीतर आयेंगे जब वह घर पर
हों।"

शाम को उस औरत का पति घर आया और
औरत ने उसे यह सब बताया।

पति – "जाओ और उनसे कहो कि मैं घर
आ गया हूँ और उनको आदर सहित बुलाओ।"

औरत बाहर गई और उनको भीतर आने के
लिए कहा।

संत बोले – "हम सब किसी भी घर में एक साथ
नहीं जाते।"

"पर क्यों?" – औरत ने पूछा।

उनमें से एक संत ने कहा – "मेरा नाम धन है"

फ़िर दूसरे संतों की ओर इशारा कर के कहा –
"इन दोनों के नाम सफलता और प्रेम हैं।

हममें से कोई एक ही भीतर आ सकता है।

आप घर के अन्य सदस्यों से मिलकर तय कर
लें कि भीतर किसे निमंत्रित करना है।"

औरत ने भीतर जाकर अपने पति को यह सब
बताया।

उसका पति बहुत प्रसन्न हो गया और

बोला –"यदि ऐसा है तो हमें धन को आमंत्रित
करना चाहिए।
हमारा घर खुशियों से भर जाएगा।"

पत्नी – "मुझे लगता है कि हमें सफलता को
आमंत्रित करना चाहिए।"

उनकी बेटी दूसरे कमरे से यह सब सुन रही थी।
वह उनके पास आई और बोली –
"मुझे लगता है कि हमें प्रेम को आमंत्रित करना
चाहिए। प्रेम से बढ़कर कुछ भी नहीं हैं।"

"तुम ठीक कहती हो, हमें प्रेम
को ही बुलाना चाहिए" – उसके माता-पिता ने
कहा।

औरत घर के बाहर गई और उसने संतों से पूछा –
"आप में से जिनका नाम प्रेम है वे कृपया घर में
प्रवेश कर भोजन गृहण करें।"

प्रेम घर की ओर बढ़ चले।

बाकी के दो संत भी उनके
पीछे चलने लगे।

औरत ने आश्चर्य से उन दोनों से पूछा –
"मैंने
तो सिर्फ़ प्रेम को आमंत्रित किया था। आप लोग
भीतर क्यों जा रहे हैं?"

उनमें से एक ने कहा – "यदि आपने धन और
सफलता में से किसी एक को आमंत्रित किया होता
तो केवल वही भीतर जाता।

आपने प्रेम को आमंत्रित किया है।

प्रेम कभी अकेला नहीं जाता।
प्रेम जहाँ-जहाँ जाता है, धन और सफलता
उसके पीछे जाते हैं।

इस कहानी को एक बार, 2 बार, 3 बार
पढ़ें ........

अच्छा लगे तो प्रेम के साथ रहें,

प्रेम बाटें, प्रेम दें और प्रेम लें

क्यों कि प्रेम ही
सफल जीवन का राज है।
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