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parampujy Guruvar Sudhanshuji Maharaj ka Shishay

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Friday, August 5, 2016

जो हम पाना

जो हम पाना चाह्ते है उसका कारण कर्म में छिपा है। अच्छा कर्म करने से अच्छाफल पाया जा सकता है।


Thursday, August 4, 2016

मानव जीवन अनमोल है

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परम पूज्य सुधांशुजी महाराज 


मानव जीवन अनमोल हैमनुष्य से ज्यादा कीमती चीज दुनियामें कोई नहींऔर मनुष्य के पास कीमती चीज हैश्वासों की पूंजीउसका समय्।

Tuesday, August 2, 2016

यदि किसी का प्रिय

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परम पूज्य सुधांशुजी महाराज 


यदि किसी का प्रिय कार्य कर दिया है तो उसके सम्बन्ध में मौन रहो और यदि किसी ने तुम्हारा उपकार किया है तो उसे सबके सामने प्रकट करते रहो।

Monday, August 1, 2016

जीवन के अन्तिम

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परम पूज्य सुधांशुजी महाराज 




जीवन के अन्तिम क्षण तक दूसरों की सेवा, सहायता, सहयोग की कामना तो रखो, परन्तु किसी से माँगने की कामना नहीं 

Sunday, July 31, 2016

मेरा शंकर भोला है

मेरा शंकर भोला है मेरा शंकर भोला है !
शिव शंकर मेरा भोला है भीमाशंकर मेरा भोला है !!
उसके एक हाथ में डमरू सोहे दुसरे हाथ में भाला है !
बाम अंग में गौरी विराजत गोद में गणपति लाला है !!
मेरा शंकर भोला है ....
पाऊं में खडाऊं साजत कानन में कुंडल !
माथे पर चन्द्रमा विराजत केसों से बहती गंग धारा है !!मेरा शंकर भोला है ....
विष्णु को देदी मोतिन की माला ख़ुद पहने सर्पों की माला है !
विष्णु को देदी पीताम्बरी खुद ओढे गज छाला है !!मेरा शंकर भोला है ....
ब्रह्मा को देदिया ब्रह्मा लोक और विष्णू को देदिया स्वर्ग लोक ख़ुद मरघट में रहता है !
देवों को देदिया अमृत का प्याला ख़ुद पी गये विष प्याला है !!मेरा शंकर भोला है ....
कहे मदन गोपाल मेरा शंकर भोला है !
१-८-2006

Saturday, July 30, 2016

दूसरों को क्षमा


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परम पूज्य सुधांशुजी महाराज 

दूसरों को क्षमा लरना सीखो , क्रोध को क्षमा से ,हिंसा को क्षमा से ,सहनशीलता से ,शांती से ,प्रसन्नता से , सोम्यतासे ,मधुरता से , शिष्टता से जीतने की कोशिश करो विशेषता आयेगी !

Tuesday, July 26, 2016

जीवन परिवर्तन

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परम पूज्य सुधांशुजी महाराज 


जीवन परिवर्तन का नाम है और परिवर्तन जीवन का सौंदर्य है।

Friday, July 22, 2016

शांति की इच्छा

शांति की इच्छा से शांति नहीं आती ,इच्छा की शांति से शांति आती है ! इसलिए ईच्छाओं को शांत करो शांति अपने आप आजाएगी ! 


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Thursday, July 21, 2016

प्रश्न :-मुझे क्रोध बहुत आता हे !क्रोध



प्रश्न :-मुझे क्रोध बहुत आता हे !क्रोध की स्थिति में कुछ भी कर डालता हूँ जो कई बार बहुत हानिकारक भी होता है ! में क्या करूँ कैसे अपने क्रोध को रोकूँ? 
गुरूदेव :-आप पहले तो एकांत में बैठकर यह विचार करें कि आपको क्रोध आता ही क्यों है !सामान्यत: व्यक्ति जो सोचता है वह नहीं हो पाए ,स्वार्थ सिद्धि  में बाधा आए , अथवा परिस्थितियाँ प्रतिकूल हो जाए तो क्रोध आता है ! हानि  से बचने के लिए आवश्यक यह है कि जब भी क्रोध आए , लम्बी गहरी श्वास लें और क्रोध के विषय से स्वंय को दूर ले जाए और प्रतिकार को २४ घंटे के लिए टाल दें !मन में अपने गुरु का ध्यान और मन्त्र जाप शुरू कर दें !बाद में एकांत में विचार करें इस स्थिति के लिए में कहाँ तक दोषी हूँ !

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