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Tuesday, August 9, 2011

आज का विचार - 8/8/11


आज का विचार - 8/8/11



हमेशा याद रखिए दुर्बलता की बातें करने से, दुर्बलता की बातें सोचने से कोई भी व्यक्ति शक्तिवान नहीं होता। शक्ति को याद करके,
 
शक्ति को पहचान कर अपने अन्दर की खोई हुई शक्ति को जगाकर ही आप बलवान बन सकते हैं
 
 

परम पूज्य सुधांशुजी महाराज

 

 

Always remember you cannot be strong if you keep thinking about your shortcomings or weaknesses.

 

Remembering strength and recognizing it, one can awaken inner strength that has been lost.  

 

 

Translated by Humble Devotee

Praveen Verma



 

Fwd: [HamareSaiBaba] माता वैष्णो देवी



---------- Forwarded message ----------
From: Maneesh Bagga <maneeshbagga@saimail.com>
Date: 2011/8/9
Subject: [HamareSaiBaba] माता वैष्णो देवी
To: hamare sai <hamaresaibaba@googlegroups.com>, shirdi-sai-baba-sai-satcharitra@googlegroups.com


 
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वैष्णो देवी
माता वैष्णो देवी को लेकर कई कथाएँ प्रचलित हैं। एक प्रसिद्ध प्राचीन मान्यता के अनुसार माता वैष्णो के एक परम भक्त श्रीधर की भक्ति से प्रसन्न होकर माँ ने उसकी लाज रखी और दुनिया को अपने अस्तित्व का प्रमाण दिया। एक बार ब्राह्मण श्रीधर ने अपने गाँव में माता का भण्डारा रखा और सभी गाँववालों व साधु-संतों को भंडारे में पधारने का निमंत्रण दिया। पहली बार तो गाँववालों को विश्वास ही नहीं हुआ कि निर्धन श्रीधर भण्डारा कर रहा है। श्रीधर ने भैरवनाथ को भी अपने शिष्यों के साथ आमंत्रित किया गया था। भंडारे में भैरवनाथ ने खीर-पूड़ी की जगह मांस-मदिरा का सेवन करने की बात की तब श्रीधर ने इस पर असहमति जताई। अपने भक्त श्रीधर की लाज रखने के लिए माँ वैष्णो देवी कन्या का रूप धारण करके भण्डारे में आई। भोजन को लेकर भैरवनाथ के हठ पर अड़ जाने के कारण कन्यारूपी माता वैष्णो देवी ने भैरवनाथ को समझाने की कोशिश की किंतु भैरवनाथ ने उसकी एक ना मानी। जब भैरवनाथ ने उस कन्या को पकड़ना चाहा, तब वह कन्या वहाँ से त्रिकूट पर्वत की ओर भागी और उस कन्यारूपी वैष्णो देवी ने एक गुफा में नौ माह तक तपस्या की। इस गुफा के बाहर माता की रक्षा के लिए हनुमानजी ने पहरा दिया। आज इस पवित्र गुफा को 'अर्धक्वाँरी' के नाम से जाना जाता है। अर्धक्वाँरी के पास ही माता की चरण पादुका भी है। यह वह स्थान है, जहाँ माता ने भागते-भागते मुड़कर भैरवनाथ को देखा था। कहते हैं उस वक्त हनुमानजी माँ की रक्षा के लिए माँ वैष्णो देवी के साथ ही थे। हनुमानजी को प्यास लगने पर माता ने उनके आग्रह पर धनुष से पहाड़ पर एक बाण चलाकर जलधारा को निकाला और उस जल में अपने केश धोए। आज यह पवित्र जलधारा 'बाणगंगा' के नाम से जानी जाती है, जिसके पवित्र जल का पान करने या इससे स्नान करने से भक्तों की सारी व्याधियाँ दूर हो जाती हैं।
 
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भैरोनाथ मंदिर
जिस स्थान पर माँ वैष्णो देवी ने हठी भैरवनाथ का वध किया, वह स्थान आज पूरी दुनिया में 'भवन' के नाम से प्रसिद्ध है। इस स्थान पर माँ काली (दाएँ), माँ सरस्वती (मध्य) और माँ लक्ष्मी पिंडी (बाएँ) के रूप में गुफा में विराजित है, जिनकी एक झलक पाने मात्र से ही भक्तों के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। इन तीनों के सम्मि‍लित रूप को ही माँ वैष्णो देवी का रूप कहा जाता है।

भैरवनाथ का वध करने पर उसका शीश भवन से 3 किमी दूर जिस स्थान पर गिरा, आज उस स्थान को 'भैरोनाथ के मंदिर' के नाम से जाना जाता है। कहा जाता है कि अपने वध के बाद भैरवनाथ को अपनी भूल का पश्चाताप हुआ और उसने माँ से क्षमादान की भीख माँगी। माता वैष्णो देवी ने भैरवनाथ को वरदान देते हुए कहा कि मेरे दर्शन तब तक पूरे नहीं माने जाएँगे, जब तक कोई भक्त मेरे बाद तुम्हारे दर्शन नहीं करेगा।

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Fwd: आज का विचार - 8/8/11






हमेशा याद रखिए दुर्बलता की बातें करने से, दुर्बलता की बातें सोचने से कोई भी व्यक्ति शक्तिवान नहीं होता। शक्ति को याद करके,
 
शक्ति को पहचान कर अपने अन्दर की खोई हुई शक्ति को जगाकर ही आप बलवान बन सकते हैं
 
 

परम पूज्य सुधांशुजी महाराज

 

 

Always remember you cannot be strong if you keep thinking about your shortcomings or weaknesses.

 

Remembering strength and recognizing it, one can awaken inner strength that has been lost.  

 

 

Translated by Humble Devotee

Praveen Verma




आजका जीवन सूत्र ९ -८-११

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आजका जीवन सूत्र ९ -८-११ 
आजकल हमारी  ज़िन्दगी में कोई सिद्धांत ही नहीं है यह पतन है !

Monday, August 8, 2011

आजका जीवन सूत्र ८-८-११

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आजका जीवन सूत्र ८-८-११ 
जहां अव्यवस्था है वहां नरक है !




Fwd: आज का विचार - 8/7/11






भविष्य  जानने की कोशिश मत करो। भविष्य परमात्मा के हाथ में है, वर्तमान आप के हाथ में है। भूतकाल बीत गया, उस की कोई कीमत नहीं । 
 
वर्तमान को अच्छा बना रहे है तो भविष्य की नींव डाल रहे हैं ।


परम पूज्य सुधांशुजी महाराज


 

Do not try to predict the future. The future is in God's hands.  Only the present is in our hands. 

 

The past has already happened and there is no value in dwelling on it. 

 

If we can better our present then that will be the foundation for a better future.


Translated by Humble Devotee
Praveen Verma

 

Fwd: आज का विचार - 8/8/11






भगवान को पाने के लिये मन में केवल भगवान को बिठाइये।संसार मै रहिये, किन्तु संसार को मन में मत बसा लीजिये।
 

परम पूज्य सुधांशुजी महाराज


Only god should be in our minds if we want to acquire him. One can live in the world but the world should not be in the mind all the time.
 
 
Translated by Humble Devotee
Praveen Verma


 

Sunday, August 7, 2011

आजका जीवन सूत्र ७-८-११

आजका जीवन सूत्र ७-८-११ 
बच्चे आपकी असली संपत्ति हैं उनकी रक्षा करो उनको बुरी सांगत से बचाओ !








Saturday, August 6, 2011

Fwd: आज का विचार






जीवन में जागृति बहुत जरूरीहै । जीवन में श्रेष्ठ को जानलो, पहचान लो और उसके लिए जागृत हो जाओ।



परम पूज्य सुधांशुजी महाराज


 
Awareness is very important in life. Know what is best in life, recognize it, and have awareness about it.


Translated by Humble Devotee
Praveen Verma


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