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parampujy Guruvar Sudhanshuji Maharaj ka Shishay

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Tuesday, January 13, 2015

प्रकिृति



ख़ुद खा लेना प्रकिृति ,
छीन कर खाना विकृति  ,
अपना भाग भी दूसरों को देदेना संसकृती ! 

Monday, January 12, 2015

घमंड में आदमी





घमंड में आदमी फूलता जरूर है पर फैलता नहीं है न फलता है !
काल का भी काल महाकाल है !
जिल्लत की जिन्दगी मौत है !

अपने को शांत




अपने को शांत बनाओ ,उलझनों में मत फंसो -ऍम बड़ा रखो ऊँचे से ऊँचे उठो - नियम बनालो उलझाना नहीं है 

Sunday, January 11, 2015

भलाई के लिय





भलाई के लिय संकोच कर जाते हैं ,लड़ाई के लिय समय अपने आप निकल आता है 

जब तक आप अपने




जब तक आप अपने आप को नहीं सम्झायागे ,समझ नहीं आयगी ,भगवान समझाने नहीं आयंगे ,और बहार से किसी शब्द की पड़ेगी चोट तब समझ आजायगी।

Saturday, January 10, 2015

कर्म करना एक




कर्म करना एक महत्त्वपूर्ण अंग है ,मगर इस से पहले ठीक योजना बनाओ ,ठीक पलानिंग करो ,और निर्णय लेने के बाद भी केईबार उस पर सोचो और जब ठीक समझो तो उस पर जी जान लगा कर अमल करो ! 

Thursday, January 8, 2015

विचार शक्ति


  1. विचार शक्ति हमें प्रेरित करती है कुछ भी कराने को !

हंसना ,हंसाना



हंसना ,हंसाना ,गुनगुनाना अगर ख़तम होगया तो दिमाग भी कमजोर होजाता है !

Wednesday, January 7, 2015

भगवान मुझे





  • प्रजापति यानी है भगवान मुझे ऐसी बुद्धी दो की दूसरों का भी भला कर सकूँ !
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