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parampujy Guruvar Sudhanshuji Maharaj ka Shishay

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Thursday, January 15, 2015

भग्वान बोलते हे




1 ] प्रार्थना में भगत बोलता है और भग्वान चुप रहते हे ! 
2 ] ध्यान में भगत चुप रहता है और भग्वान बोलते हे !

इधरउधर भागने की



इधरउधर भागने की जरुरत नहीं है ,एक अपने ईश में ,एक गुरु में एक धर्म में ,एक कर्म में विश्वास रखो तो सब ठीक होजायगा ! 

Wednesday, January 14, 2015

भाग्यवादी निराशावादी






बहुत भाग्यवादी निराशावादी मत बनो ,अति मत करो मध्यम से चलो न भगवान् से मुंह मोडो न संसार से मुंह मोडो सामंजस्य बना कर रखो ! 


Tuesday, January 13, 2015

प्रकिृति



ख़ुद खा लेना प्रकिृति ,
छीन कर खाना विकृति  ,
अपना भाग भी दूसरों को देदेना संसकृती ! 

Monday, January 12, 2015

घमंड में आदमी





घमंड में आदमी फूलता जरूर है पर फैलता नहीं है न फलता है !
काल का भी काल महाकाल है !
जिल्लत की जिन्दगी मौत है !

अपने को शांत




अपने को शांत बनाओ ,उलझनों में मत फंसो -ऍम बड़ा रखो ऊँचे से ऊँचे उठो - नियम बनालो उलझाना नहीं है 

Sunday, January 11, 2015

भलाई के लिय





भलाई के लिय संकोच कर जाते हैं ,लड़ाई के लिय समय अपने आप निकल आता है 

जब तक आप अपने




जब तक आप अपने आप को नहीं सम्झायागे ,समझ नहीं आयगी ,भगवान समझाने नहीं आयंगे ,और बहार से किसी शब्द की पड़ेगी चोट तब समझ आजायगी।

Saturday, January 10, 2015

कर्म करना एक




कर्म करना एक महत्त्वपूर्ण अंग है ,मगर इस से पहले ठीक योजना बनाओ ,ठीक पलानिंग करो ,और निर्णय लेने के बाद भी केईबार उस पर सोचो और जब ठीक समझो तो उस पर जी जान लगा कर अमल करो ! 

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