Blog Archive

About Me

My photo
parampujy Guruvar Sudhanshuji Maharaj ka Shishay

Labels

Subscribe to Deciples-of-Sudhanshujimaharaj

Powered by us.groups.yahoo.com

WELCOME

YOU ARE WELCOME TO THIS BLOG

PLEASE VISIT UP TO END OF THE BLOG

Saturday, February 14, 2015

अपना मन



  • भक्त वह है जो अपना मन उस पृथ्वी के समान बना ले जिस मैं लोग विष्टा डालते हैं पर वह अन्न देती है !
  • परम पूज्य सुधांशुजी महाराज

Friday, February 13, 2015

जितनी महिमा माँ



  • ऐक बार ऐक व्यक्ति ने स्वामी विवेकानन्द से पूछा , स्वामीजी सासार में जितनी महिमा माँ की हे उतनी पिताओं की क्यों नहीं हे ! स्वामी विवेकानंद ने ऐक बडा सा पत्थर मँगवाया और उस व्यक्ति से कहा कि त्तुम
    आज घर लौट कर अपने सारे काम ईस पत्थर को अपनी कमर से बाँधकर करना तुम को खुद मालूम हो जायेगा !
    अगले दिन वह व्यक्ति फिर स्वामी जी के पास आया और बोला -स्वामी जी यह आपने कैसा काम दिया मुझे ! मेरी कमर में भयानक दर्द हो रहा हे , पर इससे मेरे सवाल का जवाब तो नहीं मिला !
    विवेकानंद मुस्करा कर बोले बस इसी में प्रशन का जवाब हे ! ऐक ही दिन में तुम इतने कष्ट में आगयेजब कि ऐक माँ तमाम कष्टों को सहते हुए नौ महीने तक संतान को पेट में पालती है ! इसलिए इस संसार में उस की नहीं तो किस कि महिमा होगी !
    अब उसके समझ में आया कि माँ को महत्व क्यों देते हें

Thursday, February 12, 2015

जीवन का सबसे

from whatapps
जीवन का सबसे बड़ा अपराध - किसी की आँख में आंसू आपकी वजह से होना।
और
जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि - किसी की आँख में आंसू आपके लिए होना।

ईश्वर का दिया

from whatapps
ईश्वर का दिया कभी अल्प नहीं होता;
जो टूट जाये वो संकल्प नहीं होता;
हार को लक्ष्य से दूर ही रखना;
क्योंकि जीत का कोई विकल्प नहीं होता।

Tuesday, February 10, 2015

दुखों को सहने

  • दुखों को सहने की शक्ति हो और उलझनों को सुलझाने की सुबुधि हों वह मालामाल है !

Sunday, February 8, 2015

प्रभु कृपा से मिलती





"जिस जिन्दगी में शान्ति नहीं हें वो कुछ भी कर ले वो अधूरा इन्सान हें। शान्ति से ही विकास होता है।
 आप जिन्दगी में अगर किसी को महत्व दें तो मन की शान्ति को महत्व दीजिए
 और वो प्रभु कृपा से मिलती है, सदगुरु की शरण से मिलती है।"

Saturday, February 7, 2015

भगवान को

  



  • भगवान को भूलना मत ,

  • सत्य को छोड़ना मत ,

  • संपति से फूलना मत ,

  • विपत्ती मैं मुरझाना मत ,

  • परमार्थ सेवा कराने से रुकना मत !

Friday, February 6, 2015

मनुष्य की यही महिमा




"मनुष्य की यही महिमा हें कि वह स्वतन्त्र हें कर्म करने में और न करने में भी वह स्वतन्त्र हें और यही उसका विषाद भी हें । मनुष्य गलत करने में भी स्वतन्त्र हें । स्वतन्त्रता में गलत और सही दोनों की स्वतन्त्रता हें ।"

Thursday, February 5, 2015

दुनियाँ में चाहे कोई

"जंगल का राजा सिंह सबसे ज्यादा पराक्रमी, बलशाली और शक्तिशाली होता हें । इतना सामर्थ्यवान होने के बाद भी
उसके मुख में शिकार अपने आप आकर नहीं गिरता। उसे भी उठकर परिश्रम करना पड़ता हें ।
दुनियाँ में चाहे कोई कितना भी समर्थ हें या असमर्थ हें, निर्बल या बलशाली हें, हर एक को परिश्रम करना पड़ेगा,
अगर वह सफलता  प्राप्त करना चाहता हें"।

amazon code

AdSense code

Visitor Count

THANKS

YHANKS FOR YOUR VISIT