Subject: guruji ke agami programm upto 15 october...
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Friday, August 12, 2011
Fwd: guruji ke agami programm upto 15 october...
Subject: guruji ke agami programm upto 15 october...
Fwd: आज का विचार - 8/11/11
From: Madan Gopal Garga <mggarga@gmail.com>
Date: 2011/8/12
Subject: Fwd: आज का विचार - 8/11/11
To: mggarga4 <mggarga4@gmail.com>
परम पूज्य सुधांशुजी महाराज
Critically examine your flaws. Overlook the flaws you might notice in others.
Translated by Humble Devotee
Praveen Verma
Fwd: [GURUVANNI] jigyasa aur samadhan: आज की युवा शक्ति जोकि भौतिक चकाचौंध
From: Madan Gopal Garga <mggarga@gmail.com>
Date: 2011/8/12
Subject: Fwd: [GURUVANNI] jigyasa aur samadhan: आज की युवा शक्ति जोकि भौतिक चकाचौंध
To: mggarga4 <mggarga4@gmail.com>
From: Madan Gopal Garga <mggarga@gmail.com>
Date: 2011/8/11
Subject: [GURUVANNI] jigyasa aur samadhan: आज की युवा शक्ति जोकि भौतिक चकाचौंध
To: mggarga@gmail.com
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Posted By Madan Gopal Garga to GURUVANNI at 8/11/2011 05:11:00 PM
Thursday, August 11, 2011
आजका जीवन सूत्र ११ -८-११
आजका जीवन सूत्र ११ -८-११
Fwd: आज का विचार - 8/10/11
परम पूज्य सुधांशुजी महाराज
The way to live life is to be carefree, happy, peaceful, satisfied, and always in high spirits.
Translated by Humble Devotee
Praveen Verma
Wednesday, August 10, 2011
आजका जीवन सूत्र १० -८-११
आजका जीवन सूत्र १० -८-११
आज का विचार - 8/9/11
अपने आप को गुमराह होने से बचाओ। अपना सहारा खुद बनो, दूसरों के सहारे मत रहो।
परम पूज्य सुधांशुजी महाराज
Tuesday, August 9, 2011
आज का विचार - 8/8/11
आज का विचार - 8/8/11
शक्ति को पहचान कर अपने अन्दर की खोई हुई शक्ति को जगाकर ही आप बलवान बन सकते हैं ।
परम पूज्य सुधांशुजी महाराज
Always remember you cannot be strong if you keep thinking about your shortcomings or weaknesses.
Remembering strength and recognizing it, one can awaken inner strength that has been lost.
Translated by Humble Devotee
Praveen Verma
Fwd: [HamareSaiBaba] माता वैष्णो देवी
From: Maneesh Bagga <maneeshbagga@saimail.com>
Date: 2011/8/9
Subject: [HamareSaiBaba] माता वैष्णो देवी
To: hamare sai <hamaresaibaba@googlegroups.com>, shirdi-sai-baba-sai-satcharitra@googlegroups.com
भैरवनाथ का वध करने पर उसका शीश भवन से 3 किमी दूर जिस स्थान पर गिरा, आज उस स्थान को 'भैरोनाथ के मंदिर' के नाम से जाना जाता है। कहा जाता है कि अपने वध के बाद भैरवनाथ को अपनी भूल का पश्चाताप हुआ और उसने माँ से क्षमादान की भीख माँगी। माता वैष्णो देवी ने भैरवनाथ को वरदान देते हुए कहा कि मेरे दर्शन तब तक पूरे नहीं माने जाएँगे, जब तक कोई भक्त मेरे बाद तुम्हारे दर्शन नहीं करेगा।
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