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parampujy Guruvar Sudhanshuji Maharaj ka Shishay

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Thursday, February 19, 2015

Fwd: Good poem





Just remembered this beautiful poem....

When I'll be dead.....,
Your tears will flow,..
But I won 't know...
Cry for me now instead !

you will send flowers,..
But I won't see...
Send them now instead !

you'll say words of praise,..
But I won't hear..
Praise me now instead !

you'll forget my faults,..
But I won't know...
Forget them now, instead !

You'll miss me then,...
But I won't feel...
Miss me now, instead
you'll wish...
you could have spent more time with me,...
Spend it now instead !!

Moral......
''Spend time with every person around you, your
families and  friends.
Make them feel Special...
because you never know when time will take
them away from you forever.

Life is too short.
Love all and Forgive all.


Fwd:





कुछ अच्छी लाइने

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नज़र और नसीब का कुछ ऐसा इत्तेफाक हैं कि नज़र को अक्सर वही चीज़ पसंद आती हैं; जो नसीब में नहीं होती:! और नसीब में लिखी चीज़ अक्सर नज़र नहीं:!!
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मैंने एक दिन खुदा से पुछा: आप मेरी दुआ उसी वक्त क्यों नहीं सुनते; जब मैं आपसे मांगता हूँ? खुदा ने मुस्कुरा कर कहा: मैं तो तेरे गुनाहों की सजा भी उस वक्त नहीं देता जब तू करता हैँ:!!
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किस्मत पहले ही लिखी जा चुकी है; तो कोशिश करने से क्या मिलेगा? क्या पता किस्मत में लिखा हो कि कोशिश से ही मिलेगा:!!
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ज़िन्दगी में कुछ खोना पड़े तो यह दो लाइन याद रखना: 'जो खोया है उसका ग़म नहीं लेकिन जो पाया है वो किसी से कम नहीं:!' 'जो नहीं है वो एक खवाब हैं; और जो है वो लाजवाब है:!!'
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इन्सान केहता है कि पैसा आये तो मैं कुछ करके दिखाऊ; और पैसा केहता हैं कि तू कुछ करके दिखाए तो मैं आऊ:!
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बोलने से पेहले लफ्ज़ आदमी के गुलाम होते हैं; लेकिन बोलने के बाद इंसान अपने लफ़्ज़ों का गुलाम बन जाता हैँ:!!
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ज्यादा बोझ लेकर चलने वाले अक्सर डूब जाते हैं; फिर चाहे वो अभिमान का हो; या सामान का:!! 

जिन्दगी जख्मो से भरी हैं; वक़्त को मरहम बनाना सिख लें; हारना तो है मोतके सामने; फ़िलहाल जिन्दगी से जीना सिख लें:!!
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Wednesday, February 18, 2015

मनुष्य की यही महिमा

"मनुष्य की यही महिमा हें कि वह स्वतन्त्र हें कर्म करने में और न करने में भी वह स्वतन्त्र हें और यही उसका विषाद भी हें । मनुष्य गलत करने में भी स्वतन्त्र हें । स्वतन्त्रता में गलत और सही दोनों की स्वतन्त्रता हें ।"

Tuesday, February 17, 2015

उम्र के त्यौहार


  • अश्क आख़िर अश्क है शबनम नहीं है ,
  • दर्द आखिर दर्द है सरगम नहीं है ,
  • उम्र के त्यौहार में रोना मना है ,
  • जिंदगी आख़िर जिंदगी है मातम नहीं है !
  • परम पूज्य सुधांशुजी महाराज
  • Saturday, February 14, 2015

    अपना मन



    • भक्त वह है जो अपना मन उस पृथ्वी के समान बना ले जिस मैं लोग विष्टा डालते हैं पर वह अन्न देती है !
    • परम पूज्य सुधांशुजी महाराज

    Friday, February 13, 2015

    जितनी महिमा माँ



    • ऐक बार ऐक व्यक्ति ने स्वामी विवेकानन्द से पूछा , स्वामीजी सासार में जितनी महिमा माँ की हे उतनी पिताओं की क्यों नहीं हे ! स्वामी विवेकानंद ने ऐक बडा सा पत्थर मँगवाया और उस व्यक्ति से कहा कि त्तुम
      आज घर लौट कर अपने सारे काम ईस पत्थर को अपनी कमर से बाँधकर करना तुम को खुद मालूम हो जायेगा !
      अगले दिन वह व्यक्ति फिर स्वामी जी के पास आया और बोला -स्वामी जी यह आपने कैसा काम दिया मुझे ! मेरी कमर में भयानक दर्द हो रहा हे , पर इससे मेरे सवाल का जवाब तो नहीं मिला !
      विवेकानंद मुस्करा कर बोले बस इसी में प्रशन का जवाब हे ! ऐक ही दिन में तुम इतने कष्ट में आगयेजब कि ऐक माँ तमाम कष्टों को सहते हुए नौ महीने तक संतान को पेट में पालती है ! इसलिए इस संसार में उस की नहीं तो किस कि महिमा होगी !
      अब उसके समझ में आया कि माँ को महत्व क्यों देते हें

    Thursday, February 12, 2015

    जीवन का सबसे

    from whatapps
    जीवन का सबसे बड़ा अपराध - किसी की आँख में आंसू आपकी वजह से होना।
    और
    जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि - किसी की आँख में आंसू आपके लिए होना।

    ईश्वर का दिया

    from whatapps
    ईश्वर का दिया कभी अल्प नहीं होता;
    जो टूट जाये वो संकल्प नहीं होता;
    हार को लक्ष्य से दूर ही रखना;
    क्योंकि जीत का कोई विकल्प नहीं होता।

    Tuesday, February 10, 2015

    दुखों को सहने

    • दुखों को सहने की शक्ति हो और उलझनों को सुलझाने की सुबुधि हों वह मालामाल है !

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